每家电站的年成本将因利用最新碳捕获和储存技术而增加10亿欧元(合14.2亿美元)。但咨询公司McKinsey and Co.说,如果引入正确的体系,填埋二氧化碳的费用到2030年将每吨下降到30到45欧元(合44到66美元)。
欧盟计划到2015年开启12个实验电站,以期减少未来排放处理的费用。据报道,欧盟快就提供几十亿欧元的公共资助来开启这些实验项目达成协议。
碳捕获被看作是一潜在解决方法,来抑制急速在印度和中国发展的燃煤电站的碳排放
इंडोनेशिया में हुए 2018 एशियाई खेलों के समापन समारोह से ठीक पहले जकार्ता का मौसम कुछ ऐसा हो
जैसी आशंका थी, कुछ ही देर में बारिश भी शुरू हो गई, लेकिन समापन समारोह पर इसका असर नहीं दिखाई दिया
बारिश इस आतिशबाज़ी को रोक न सकी और समापन समारोह शुरू हुआ
समापन समारोह जकार्ता के गेलोरा बुंग कार्नो स्टेडियम में भारतीय समयानुसार साढे पांच बजे शुरू हुआ
इंडोनेशिया के राष्ट्रगान के बाद इंडोनेशिया की पुलिस अकादमी ने सबसे पहले अपनी प्रस्तुति दी
AFP
मार्च कर रहे बैंड इंडोनेशिया शब्द के आकार में खड़े हो गए
उसके बाद शुरू हुआ - 'परेड ऑफ़
नेशन' जिसमें सभी देशों के खिलाड़ियों ने मार्च किया. भारत का झंडा उठाया
भारतीय हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल ने. भारतीय हॉकी टीम को इन खेलों
में सिल्वर मेडल मिला है.
एशियाई खेलों में 1951 के बाद पहली बार भारत ने 15 गोल्ड मेडल जीते हैं. भारत इस बार कुल 69 मैडल जीत कर आठवें स्थान पर रहा.
सभी खिलाड़ी स्टेडियम के बीचों-बीच कुछ ऐसे नज़र आ रहे थे
मशहूर कोरियाई बैंड आइकॉन ने भी समापन समारोह में अपनी प्रस्तुति दी
समापन समारोह के दौरान
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी के अध्यक्ष थॉमस बाक, कुवैती शेखृ और ओलंपिक
काउंसिल के अध्यक्ष अहमद अल-फ़हद अल-अहमद अल सबाह
में चीन के हांगझोऊ शहर में 19वें एशियाई खेल खेले जाएंगे. चीन के प्रतिनिधि एशियाई खेलों की मशाल हासिल करते हुए.भी सरकारी तौर पर कुछ सीटों के ही नतीजे आए हैं.
मुस्लिम लीग (नवाज़) और पीपल्स पार्टी समेत विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव परिणामों पर आपत्ति ज़ाहिर की है.
चुनाव आयोग का कहना है कि तकनीकी ख़राबी के कारण नतीजे आने में देरी हुई है.
21.26बजे- इमरान
ख़ान ने आम चुनावों में अपनी पार्टी की जीत का दावा किया है. उन्होंने कहा
है कि ये चुनाव पाकिस्तान के इतिहास में सबसे पारदर्शी तरीके से कराए गए
चुनाव हैं. हालांकि इमरान के विरोधियों का कहना है कि चुनाव में धांधली हुई
है और सेना इमरान ख़ान का समर्थन कर रही है. 18:02 बजे- अभी
तक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला रहा है. हम चाहते हैं कि हिंदुस्तान और
पाकिस्तान के बीच दोस्ती कायम हो. दोनों देशों के ताल्लुकात बेहतर हों. 18:00 बजे- अगर
हिंदुस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते अच्छे हों तो यह दोनों के लिए बेहतर
होगा. हमारे व्यापारिक संबंध और बेहतर हों. कश्मीर में जो हालात है, वहां
के लोगों ने जो झेला है, हमारी कोशिश होगी कि दोनों देश एक साथ बैठ कर तय
करें कि वहां की स्थिति कैसे बेहतर की जाए. 17:56 बजे - भारत
पर इमरान ख़ान ने कहा, "हिंदुस्तानी मीडिया ने मुझे ऐसे पेश किया गया जैसे
मैं फ़िल्मों का विलेन हूं. सबसे बेहतर यह है कि हम दोनों व्यापार करें.
सेना जहां जाएगी वहां मानवाधिकर उल्लंघन होगा और कश्मीर में लोगों ने सहा
है. मसले टेबल पर बैठकर हल होनी चाहिए. हिंदुस्तानी नेता अगर तैयार हैं तो
हम भी बातचीत के लिए तैयार हैं." 17:43 बजे- प्रेस
क़ॉन्फ़्रेंस में इमरान ख़ान ने कहा, "मैं राजनीतिक विरोधियों के ख़िलाफ़
बदले की भावना से कार्रवाई नहीं करूंगा. मैं एक उदाहरण पेश करना चाहता हूं
कि हमारी संस्थाएं मज़बूत हों और क़ानून का राज हो. इस देश का गवर्नेंस
सिस्टम बेहतर करना है."
इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने पिछले साल
के अंत में सीरिया और इराक पर नियंत्रण खोने के बाद हाल के दिनों में
सोमालिया में हमले बढ़ा दिए हैं.
25 जुलाई को आईएस ने दक्षिण सोमालिया के लोअर शाबेल इलाके में 14 लोगों को मारने या घायल करने का दावा किया.
बीबीसी
मॉनिटरिंग ने जनवरी से जुलाई 2018 तक सोमालिया में आईएस के हमलों से जुड़े
आंकड़े इकट्ठा किए जो इस देश में आईएस की गतिविधियों के बारे में अहम
ट्रेंड को बताता है.
आईएस का दावा है कि ख़ुफ़िया और सुरक्षाकर्मियों
पर अधिकांश हमले उसने सुनियोजित तरीके से किए हैं. कुछ हमले जो दिन के समय
किए गए उन्हें फिल्माया भी गया है.
शुरू में इस समूह ने अधिकांश
हमले दक्षिण-पश्चिमी शहर अफगोये में करने का दावा किया. लेकिन हाल में
अधिकांश हमले राजधानी मोगादिशु के आसपास के शहरों में करने का दावा किया
है.स डेटा के मुताबिक आईएस ने इस साल पहली जनवरी से 31 जुलाई तक सोमालिया में 39 हमले किये हैं.
इनमें
से 27 हमले केवल तीन महीने मई, जून और जुलाई में किए. साल 2017 में आईएस
ने पूरे साल के दौरान सोमालिया में 21 हमले करने के दावे किए थे. इसका मतलब
है कि सोमालिया में आईएस के हमलों में वृद्धि हुई है.
आईएस ने
अधिकतर घात लगाकर या गोली मारकर हत्याएं की लेकिन कुछ में इम्प्रूवाइज़्ड
एक्सप्लोसिव डिवाइस यानी आईईडी का इस्तेमाल भी किया गया.
आईएस के निशाने पर ख़ुफ़िया अधिकारी, सोमाली पुलिस और सैन्यकर्मी रहे हैं.
सोमालिया में आईएस की गतिविधियां बढ़ने के बावजूद इनके हमले अपेक्षाकृत छोटे रहे हैं.
सोमालिया में आईएस का प्रतिद्वंद्वी संगठन अल-शबाब सेना, सरकार और अफ़्रीकी सेनाओं पर अक्सर बड़े और घातक हमले करता है.
वास्तव में आज अल-शबाब की मौजूदगी सोमालिया में आईएस के विस्तार में बाधक है.
सोमालिया में आईएस चरमपंथी देश के उत्तर पूर्व में उभरने के बाद दक्षिणी हिस्से तक पहुंच गए हैं.
साथ ही राजधानी मोगादिशु के आसपास भी उनके हमलों में वृद्धि हुई है.
इस
साल जिन 39 हमलों का वो दावा करते हैं, उनमें से 23 मोगादिशु में ही किए
गए हैं. इनमें से कई हमले यहां के बकारा बाज़ार इलाके के आसपास किए गए जो
सोमालिया के मध्य में है और यहां के सबसे व्यस्त व्यवसायिक केंद्रों में से
एक माना जाता है.
मोगादिशु में आईएस के हमलों में उल्लेखनीय वृद्धि मई 2018 के महीने में देखी गई है.
इस दौरान आईएस ने अफगोये में नौ हमले जबकि सोमालिया के पूर्वोत्तर में बोसासो में तीन हमले करने का दावा किया.
मोगादिशु अफगोये से बहुत दूर नहीं है. दोनों ही शहर दक्षिण सोमालिया में स्थित हैं. दोनों के बीच दूरी महज 30 किलोमीटर की है.
रिपोर्टों के मुताबिक आईएस चरमपंथियों के हमले उत्तर पूर्वी सोमालिया के पंटलैंड से दक्षिणी हिस्से में किए गए थे.
जनवरी से जुलाई के बीच सोमालिया में आईएस के हमलों की जानकारी इस समूह की स्वघोषित 'न्यूज़ एजेंसी' अमाक़ ने दी.
अमाक़
की रिपोर्ट, भाषाई स्तर पर आईएस के बयानों से मेल नहीं खाती. अमाक़ ने कुछ
हद तक मुख्यधारा की मीडिया शैली की नकल की है. आईएस के खास सिद्धांतों
जैसे कि धार्मिक संदर्भ, जीत की गाथा, विरोधी समूहों के लिए अपमानजनक शब्द
उनकी रिपोर्ट्स में नहीं होते.
अमाक़ की अधिकतर रिपोर्ट में हमले या उसके बाद की तस्वीरें या वीडियो होते हैं.
इनमें
से कई में ये लगता है कि इनकी शूटिंग बहुत पास से की गई है. इन्हें अक्सर
दिन के उजाले और खुले सार्वजनिक इलाकों में लोगों के साथ फ़िल्माया गया है.
बीबीसी की टीम ने मूसल में क्या देखा, आप भी देखिएइसी साल 19 जुलाई को अमाक़ के एक वीडियो में सिनाए जंक्शन
इलाके में एक आदमी सोमालियाई ख़ुफ़िया विभाग के एक अधिकारी को बेहद नज़दीक
से गोली मारता दिख रहा है. सड़क किनारे बैठे व्यापारियों को देखकर ये इलाका
घनी आबादी वाला मालूम पड़ता है.
29 जून का एक और वीडियो है जिसमें
दोपहर के वक्त सादे कपड़े पहने एक आदमी बहुत नज़दीक से दो लोगों को गोली
मारता है. इस हमले को लेकर आईएस ने दावा किया कि उसने मोगादिशु के बाज़ार
में सोमालियाई सरकार के दो वित्तीय अधिकारियों को मार गिराया है.
7
मई के वीडियो में सादे कपड़े में एक आदमी माइक्रोबस में एक व्यक्ति को
मारता हुआ दिख रहा है. मारे गए व्यक्ति को सोमालिया के ख़ुफ़िया विभाग से
जुड़ा बताया गया.
अधिकतर हमले या तो पीछे से फ़िल्माए गए या कुछ दूरी से.
इस्लामिक स्टेट के ख़ात्मे के बाद भी भूतहा बना हुआ है लीबिया का सिर्ते शहरअमाक़
के वीडियो छोटे और बिना एडिट किए होते थे. आईएस ने अब तक सोमालिया को
समर्पित एक ही प्रौपेगैंडा वीडियो बनाया. दिसंबर 2017 के इस वीडियो में
क्रिसमस और नए साल के दौरान 'वेस्टर्न टारगेट' के ख़िलाफ़ हमले के लिए
उकसाया गया है.
आईएस के हमलों की जानकारी सोमालिया में आईएस के क्षेत्रीय मीडिया दफ़्तर के बजाय अमाक़ के जरिए ही आ रही हैं.
अपने क्षेत्रीय मीडिया दफ़्तर से यह समूह खास तरह के बयान जारी करता है. हमले की स्थिति में इसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है.
अमाक़ की रिपोर्ट में 'विलायाह' (इलाका) का इस्तेमाल नहीं किया जाता जबकि क्षेत्रीय बयान में इसका इस्तेमाल होता है.
रक़्क़ा के हालात पर ख़ास रिपोर्टआईएस
साल 2015 के आखिर से सोमालिया में अपनी उपस्थिति का दावा करता रहा है.
इसमें शामिल अधिकतर लोग प्रतिद्वंद्वी अल-शबाब से लाए गए हैं.
वैसे
'सोमालिया का विलायाह' मुहावरे का आईएस की इक्का दुक्का मीडिया रिपोर्ट में
ज़िक्र किया गया है. हालांकि इसका इस्तेमाल संयोगवश दिखता है ना कि
औपचारिक तौर पर.
'सोमालिया का विलायाह' का ज़िक्र इसी समूह के अरबी
के एक साप्ताहिक समाचारपत्र में जुलाई 2018 में मिलता है जबकि दूसरी बार
सोमालिया का संदर्भ विलायाह के बगैर भी दिया गया.
साल 2015 के बाद आईएस ने अपने क्षेत्रीय संगठन के संदर्भ में विलायाह शब्द का ज़िक्र करने में सावधानी बरतनी शुरू कर दी. अब्दिकादिर मुमिन को सोमालिया में आईएस चरमपंथियों का सरगना बताया जाता रहा है.
मुमिन
और कुछ लड़ाके अल-शबाब से आए हैं और अक्तूबर 2015 में वो आईएस के मुखिया
अबू बकर अल-बगदादी के साथ एक वीडियो में प्रतिज्ञा लेते हुए दिखाए गए, तब
आईएस चरम पर था.
इस प्रतिज्ञा के बाद आईएस का एक मीडिया कैंपेन भी आया जिसमें अल-शबाब के लोगों से आईएस में शामिल होने का आग्रह किया गया था.
इस्लामिक स्टेट की क्रूरता और बर्बरता की दास्तांअलग-अलग रिपोर्ट से ये संकेत मिलते हैं कि सोमालिया में आईएस के कई वफादार अल-शबाब के सदस्य थे.
अल-शबाब छोड़ने वालों ने बाद में महाद मोअलिम को मुमिन का डिप्टी कमांडर चुन लिया.
हालांकि
अल-शबाब के प्रभाव को देखते हुए यह कहना मुश्किल नहीं है कि मुमिन को
लड़ाके भर्ती करने और सोमालिया में अपनी मज़बूत उपस्थिति बनाने में
मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
कुछ वैसा ही जैसा उसे यमन जैसे अन्य
देशों में करना पड़ा था, जहां पहले से मौजूद अल-कायदा की उपस्थिति की वजह
से ये समूह घुसपैठ करने में नाकाम रहा था.
मुमिन आखिरी बार आईएस के
प्रचार में अप्रैल 2016 में एक वीडियो में देखे गए थे, जिसमें सोमालिया में
इस समूह के पहले प्रशिक्षण शिविर को दिखाया गया था. अगस्त 2016 में उन्हें
अमरीका की जारी आतंकियों की सूची में शामिल किया गया.
अमरीकी सरकार का मानना है कि सोमालिया के आईएस लड़ाके यमन से हथियार लेते हैं.
इस साल सोमालिया में आईएस की बढ़ती गतिविधियों के बावजूद इसका यहां अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी अल-शबाब से कम प्रभाव है.
जुलाई
2018 में अपने साप्ताहिक समाचारपत्र अल-नाबा के एक लेख में समूह ने लिखा
कि कैसे सोमालिया में आईएस समर्थकों को मार डाला गया या 'यहूदी जिहादियों'
ने अगवा कर लिया. आईएस की ओर से इस लफ़्ज़ का इस्तेमाल अल-क़ायदा के लिए
किया जाता था.
अल-शबाब ने देश में आईएस चरमपंथियों का खुलेआम सफ़ाया
किया है, यहां तक कि अपने उन सदस्यों का भी जो आईएस में शामिल होना चाहते
थे या उनके प्रति झुकाव रखते थे.
यह वो नारा या है या वो पंचलाइन है जिसे बीजेपी ने साल 2014 के आम चुनाव से पहले वोटरों को रिझाने के लिए इस्तेमाल किया था.
दरअसल इसी शीर्षक की एक कविता आज़ादी से पहले लिखी गई थी.
कविता कुछ इस तरह थी-
ऐ मादरे हिंद न हो ग़मग़ीन, अच्छे दिन आने वाले हैं. आज़ादी का संदेश तुझे अब जल्द सुनाने वाले हैं. मां तुझको जिन जल्लादों ने दी है तकलीफ़ जईफी में, मायूस न हो, मगरूरों को हम अब मज़ा चखाने वाले हैं.
अंग्रेज सरकार इस कविता से इतना डर गई थी कि उसने इस पर प्रतिबंध लगा दिया.
अभी यह कविता दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय की प्रतिबन्धित साहित्य प्रदर्शनी में लगी हुई और काफ़ी लोगों का ध्यान खींच रही है.
इस कविता का संकलन घासीराम शर्मा ने गीतांजलि नाम की किताब में किया था. हालांकि ये पता नहीं लग पाया है कि ये कविता लिखी किसने है.
यह ख़बर टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक रिपोर्ट
आधार पर जारी विवादों के बीच यूनीक आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया
( ) ने अब लोगों को यह बताने की योजना बनाई है कि सुरक्षित तरीके से
आधार नंबर का इस्तेमाल कैसे किया जाए. यानी, कहां आधार नबंर शेयर किया जाए
और कहां नहीं.
यह ख़बरनवभारत टाइम्स में है.
यूआईडीएआई
के सीईओ अजय भूषण पांडेय ने कहा है कि आधार के इस्तेमाल से जुड़ी शंकाओं
के समाधान के लिए जल्दी ही FAQ (फ़्रीक्वेंटली आस्क्ड क्वेश्चन्स) की एक
लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसमें क़रीब एक दर्जन सवालों के जवाब होंगे.
आधार
से जुड़ा विवाद तब और तेज़ हो गया जब ट्राई के चेयरपर्सन आरएस शर्मा ने
ट्विटर पर अपना आधार नंबर शेयर कर दिया और इसकी बाद उनकी निजी जानकारियां (
अकाउंट नंबर, फ़ोन नंबर और पता) सामने आ गईं.
है जो सरकार और न्यायपालिका के बीच का मतभेद उजागर करती है.
रिपोर्ट
के मुताबिक सरकार ने हाई कोर्ट के जजों के लिए सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के
सुझाए 50% से ज़्यादा नामों पर किसी न किसी तरह की आपत्ति जताई है.
सुप्रीम
कोर्ट कोलेजियम की तरफ़ से केंद्र सरकार को अब तक 126 जजों के नामों की
सिफ़ारिश भेजी गई है, जिनमें से सरकार ने आधे से ज़्यादा नामों में कोई न
कोई कमी निकाल दी.
इससे पहले सरकार ने कोलेजियम नामों की सिफ़ारिशों पर परिवारवाद का आरोप भी लगाया था. दैनिक जागरण की एंकर स्टोरी है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ही एक और रिपोर्टमर उजाला की ख़बर के मुताबिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12
साल के कम उम्र की बच्चों के साथ बलात्कार पर फांसी की सज़ा वाले क़ानून पर
हस्ताक्षर कर कर दिए हैं.
इसके प्रावधानों के मुताबिक दो महीने के भीतर बलात्कार मामले की जांच पूरी करना अनिवार्य होगा.
है, जो बताती है कि भारत में सिर्फ 2% ट्रांसजेंडर अपने माता-पिता के साथ रहते हैं.
यह जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से कराए गए एक अध्ययन में सामने आई है.
अध्ययन
से यह भी पता चला है कि तक़रीबन 57% ट्रांसजेंडर सेक्स असाइन्मेंट सर्जरी
(सेक्स चेंज ऑपरेशन) कराना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से ऐसा
नहीं कर सकते.